तारा टिंकर रूम में चौखाने वाले कागज़ पर बनी योजना लेकर आई। “मेरी दादी दरवाज़े की घंटी नहीं सुन पातीं,” वह बोली। “इसलिए मैं उनके लिए सुपर बेल बना रही हूँ। दस बटन, तीन भोंपू, चमकती लाल बत्तियाँ।” मीरा ने सीटी बजाई। कबीर बहुत देर तक चित्र देखता रहा। “कमाल का लग रहा है,” उसने धीरे से कहा। “पर क्या दादी ने इसे देखा है?” तारा ठिठक गई।
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तारा अपनी दादी के लिए एक शानदार घंटी बनाती है, जो पुरानी घंटी सुन नहीं पातीं, और सीखती है कि सबसे अच्छा औज़ार वही है जो यह पूछकर बनाया जाए कि उस इंसान को सच में क्या चाहिए।
दादी के लिए तोहफ़ा
कबीर & मीरा & तारा • टेक टिंकरर्स • 6 pages • hi
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