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Pushkar समुद्र के किनारे खड़ा था। दूर एक पत्थर का पुल बन रहा था। बंदर बड़ी मेहनत से पत्थर उठा रहे थे। Pushkar के मन में मदद करने की एक चमक सी आई।
A personalized story for Pushkar
Theme: ramayana
A personalized ramayana storybook featuring Pushkar.
16 illustrated pages
Pushkar समुद्र के किनारे खड़ा था। दूर एक पत्थर का पुल बन रहा था। बंदर बड़ी मेहनत से पत्थर उठा रहे थे। Pushkar के मन में मदद करने की एक चमक सी आई।
Pushkar ने देखा कि बंदर बड़े-बड़े पत्थर उठा रहे थे। उनके हाथ लाल हो रहे थे पर वे हँस रहे थे। Pushkar ने कहा, “वाह, कितनी मेहनत!” फिर धीरे से अपने छोटे हाथ देखे और थोड़ा छोटा महसूस किया।
Pushkar ने एक पत्थर उठाने की कोशिश की। पत्थर हिला भी नहीं। Pushkar हँस पड़ा, फिर थोड़ा डर गया। “मैं इतना छोटा हूँ,” उसने सोचा, “मैं क्या करूँ?”
Pushkar धीरे-धीरे समुद्र किनारे चला। वह सोच रहा था, “मुझे कोई और तरीका ढूँढना होगा। मैं हार नहीं मानूँगा।” हवा ने उसके बालों को हल्का छुआ।
तभी Pushkar ने एक छोटी आवाज़ सुनी। एक धारीदार गिलहरी कंकड़ लुढ़का रही थी। “तुम भी मदद कर रहे हो!” Pushkar ने मुस्कुराकर कहा। गिलहरी की छोटी मेहनत बड़ी लगी।
Pushkar ने गिलहरी को ध्यान से देखा। वह कंकड़ चुनती और लुढ़काती। Pushkar को उसके छोटे पंजों पर गर्व हुआ। “तुम सच में बहादुर हो,” उसने प्यार से कहा।
एक बड़ा पत्थर डगमगाया। बंदर चौंक गए। पुल हिलने लगा। Pushkar का दिल तेज़ धड़कने लगा। “ओह नहीं, दरारें बहुत बड़ी हैं!” उसने कहा।
Pushkar ने पत्थरों को देखा, फिर गिलहरी के कंकड़ों को। उसे समझ आया कि पुल को सिर्फ भारी पत्थर नहीं, सहारा भी चाहिए। Pushkar के चेहरे पर एक विचार चमक उठा।
“कंकड़ों और रेत से दरारें भर सकते हैं,” Pushkar ने सोचा। उसने मुट्ठी में रेत भरी। “चलो, इसे आज़माते हैं।” गिलहरी ने उसकी ओर देखा, जैसे कह रही हो, अच्छा विचार!
Pushkar ने धीरे-धीरे रेत दरारों में डाली। रेत पत्थरों के बीच बह गई। पत्थर थोड़ा शांत हुए। Pushkar ने फिर डाला। “धीरे-धीरे सही होगा,” उसने कहा।
अब Pushkar अकेला नहीं था। गिलहरी कंकड़ लुढ़काती और Pushkar रेत भरता। दोनों मिलकर हर दरार भर रहे थे। “हमारी टीम बहुत खास है,” Pushkar ने हँसकर कहा।
धीरे-धीरे पत्थर हिलना बंद हो गए। पुल मजबूत हो गया। बंदरों के कदम अब ठोस और सुरक्षित थे। Pushkar ने राहत की सांस ली। उसकी छोटी मदद सच में काम आई।
Pushkar ने आख़िरी दरार भी भर दी। उसका दिल खुशी से भर गया। “मेरी छोटी मदद भी कीमती है,” उसने धीरे कहा। अब वह और भी साहसी महसूस कर रहा था।
तभी Rama पुल पर आए। उन्होंने मजबूत पुल देखा और मुस्कुराए। Pushkar ने सीधा हो कर देखा। Rama की आँखों में गरमाहट थी, और Pushkar को गर्व हुआ।
Rama ने Pushkar और गिलहरी को देखा। “धन्यवाद,” उन्होंने कहा, “तुम्हारे दिल से यह पुल मजबूत हुआ।” Pushkar की मुस्कान फैल गई। “हमने साथ मिलकर किया,” उसने जवाब दिया।
Rama ने गिलहरी की पीठ पर तीन नरम रेखाएँ सहलाईं। गिलहरी खुश होकर सिमट गई। Pushkar ने चमकते पुल को देखा और मुस्कुराया। छोटी मदद, पूरे दिल से, सबसे बड़ी बन गई।