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गोकुल की सुनहरी सुबह में हर्षित रसोई के अंदर खड़ा था। यशोदा मैया ने मक्खन की मटकी को ऊँची अलमारी पर रख दिया था। उन्होंने हर्षित से कहा कि वह इस मटकी की रक्षा करे। हर्षित ने मुस्कुराते हुए वादा किया कि वह बिल्कुल नहीं सोएगा।
A personalized story for Harshit
Theme: janmashtami
A personalized janmashtami storybook featuring Harshit.
8 illustrated pages
गोकुल की सुनहरी सुबह में हर्षित रसोई के अंदर खड़ा था। यशोदा मैया ने मक्खन की मटकी को ऊँची अलमारी पर रख दिया था। उन्होंने हर्षित से कहा कि वह इस मटकी की रक्षा करे। हर्षित ने मुस्कुराते हुए वादा किया कि वह बिल्कुल नहीं सोएगा।
अचानक हर्षित ने खिड़की पर एक हलचल सुनी। वहाँ बंदर नाम का एक छोटा भूरा बंदर, लंबी घुमावदार पूंछ, छोटी लाल जैकेट पहने बैठा था। बंदर की शरारती आँखें सीधे ऊँची अलमारी पर टिकी थीं। हर्षित ने उसे देखकर अपनी उंगली से चुप रहने का इशारा किया।
मक्खन की ताजी खुशबू ने रसोई को महका दिया था। हर्षित ने पंजे के बल खड़े होकर मटकी को बचाने की कोशिश की। बंदर ने भी उछलकर उसे छेड़ने की नाकाम कोशिश की। हर्षित खिलखिलाकर हंसा और बोला कि यह मक्खन उत्सव के लिए है।
तभी वहाँ कृष्ण नाम का एक नन्हा बालक, चमकीली पीली धोती, मोरपंख पहने रेंगते हुए आया। उसकी आँखों में चमक और चेहरे पर एक प्यारी मुस्कान थी। हर्षित हैरान रह गया कि आखिर वह इतनी जल्दी यहाँ कैसे पहुँच गया। क्या वह भी मक्खन का स्वाद चखना चाहता था?
हर्षित एक बड़े विरोधाभास में फंस गया था। उसे मक्खन की रक्षा करनी थी, लेकिन अपने दोस्तों को दुखी भी नहीं करना चाहता था। बंदर ने अपनी पूंछ हिलाई और कृष्ण ने अपने नन्हे हाथ फैला दिए। हर्षित ने सोचा कि क्या साझा करना ही सबसे बड़ी बुद्धिमानी है?
हर्षित ने मटकी उतारी और एक चम्मच सफेद मक्खन निकाला। उसने मुस्कुराते हुए बंदर को एक हिस्सा दिया और फिर कृष्ण को खिलाया। साझा करने से वह छोटा सा मक्खन का स्वाद अब बहुत बड़ा और मीठा लग रहा था। यह एक अद्भुत एहसास था।
तीनों के चेहरे मक्खन से सने थे और रसोई हंसी से गूंज उठी। हर्षित ने देखा कि साझा करने से खुशी कितनी बढ़ जाती है। बंदर ने उछलकर हर्षित के कंधे पर हाथ रखा और कृष्ण ने ताली बजाई। यह पल किसी भी उत्सव से कहीं अधिक कीमती था।
जब यशोदा मैया वापस आईं, तो उन्होंने तीन खुशहाल चेहरे और एक खाली चम्मच देखा। हर्षित ने उन्हें पूरी कहानी सुनाई और सब खिलखिलाकर हंस पड़े। उस दिन हर्षित ने सीखा कि बांटने से ही असली खुशी मिलती है। गोकुल में अब उत्सव की रोशनी जगमगाने लगी थी।