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आज गणेश चतुर्थी है, और पंडाल अभी अधूरा था। Harshit ने गहरी साँस ली और बोला, “हम इसे आज ही पूरा करेंगे।”
A personalized story for Harshit
Theme: ganesh-chaturthi
A personalized ganesh-chaturthi storybook featuring Harshit.
8 illustrated pages
आज गणेश चतुर्थी है, और पंडाल अभी अधूरा था। Harshit ने गहरी साँस ली और बोला, “हम इसे आज ही पूरा करेंगे।”
Harshit ने बच्चों को छोटे-छोटे काम बाँटे। “तुम फूल लगाओ, तुम नीचे सँभालो,” उसने कहा।
Harshit ने दीये एक सीधी कतार में रखे। कागज़ का मुकुट देखकर वह मुस्कुराया, “यह बप्पा के लिए खास है।”
धूल हटते ही पंडाल और सुंदर लगने लगा। Harshit ने हँसकर कहा, “अब जगह चमक रही है!”
फिर बप्पा की मूर्ति धीरे-धीरे मंच पर रखी गई। Harshit ने बहुत ध्यान से उसे सीधा किया।
दूर से ढोल की गूँज आई, और सब रुक गए। Harshit खुशी से बोला, “अब उत्सव शुरू हुआ!”
Harshit ने अपना बनाया मुकुट बप्पा को पहनाया। मोदक की थाली पास थी, और Harshit बहुत खुश था।
Harshit ने सबको मोदक बाँटे और मुस्कुराया। “देखो,” उसने कहा, “छोटे हाथ मिलकर बड़ा उत्सव बनाते हैं।”