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गोकुल में आज सुबह बहुत खास है। भुवि अपनी बालकनी में खड़ा होकर ताजी हवा का आनंद ले रहा है। आज जन्माष्टमी है और पूरा गाँव उत्सव की तैयारी में डूबा है। भुवि को आज एक बहुत ही महत्वपूर्ण काम सौंपा गया है। क्या वह इसे पूरा कर पाएगा?
A personalized story for Bhuvi
Theme: janmashtami
A personalized janmashtami storybook featuring Bhuvi.
8 illustrated pages
गोकुल में आज सुबह बहुत खास है। भुवि अपनी बालकनी में खड़ा होकर ताजी हवा का आनंद ले रहा है। आज जन्माष्टमी है और पूरा गाँव उत्सव की तैयारी में डूबा है। भुवि को आज एक बहुत ही महत्वपूर्ण काम सौंपा गया है। क्या वह इसे पूरा कर पाएगा?
यशोदा मैया ने भुवि को मक्खन की मटकी की रखवाली करने को कहा है। भुवि ने मटकी को ऊँची शेल्फ पर रख दिया है। उसने खुद से वादा किया है कि वह जागता रहेगा। पर तभी उसे खिड़की के पास कुछ हलचल सुनाई दी। क्या कोई उसे देख रहा है?
अचानक भुवि को एक आहट सुनाई दी। वहाँ मिटू नाम का एक नटखट बंदर बैठा था। मिटू की नजरें सीधे उस मटकी पर टिकी थीं। भुवि हँस पड़ा, क्योंकि मिटू भी मक्खन का शौकीन है। क्या भुवि उसे मक्खन खाने देगा?
तभी वहाँ नन्हा सा कान्हा भी आ पहुँचा। वह भी अपनी सुंदर बाँसुरी लिए मक्खन की तलाश में आया था। भुवि समझ गया कि आज उसकी परीक्षा होने वाली है। क्या भुवि इन दोनों दोस्तों के साथ मक्खन बाँट पाएगा?
भुवि सोच में पड़ गया कि वह क्या करे। अगर वह पूरा मक्खन दे देगा, तो त्यौहार के लिए क्या बचेगा? लेकिन कान्हा और मिटू की मासूमियत देख उसका दिल पिघल गया। उसने सोचा, शेयरिंग तो सबसे अच्छी चीज है। क्या उसे कोई तरकीब सूझेगी?
भुवि ने बड़ी चतुराई से एक चम्मच मक्खन निकाला। उसने मुस्कुराते हुए एक चम्मच मिटू को दिया और दूसरा कान्हा को। दोनों के चेहरे खुशी से खिल उठे। भुवि को एहसास हुआ कि थोड़ा सा देने में कितना बड़ा आनंद है। क्या अब सब खुश हैं?
तीनों के चेहरे पर मक्खन लगा था और वे सब खिलखिलाकर हँस रहे थे। भुवि ने मटकी का बाकी हिस्सा सुरक्षित बचा लिया था। उसे समझ आया कि सफलता सब कुछ अकेले पाने में नहीं, बल्कि साथ बाँटने में है। यह पल उसके लिए सबसे यादगार बन गया।
जब यशोदा मैया वापस आईं, तो उन्होंने तीन खुशहाल चेहरे देखे। मटकी भी सुरक्षित थी और त्यौहार का आनंद भी दुगुना हो गया था। भुवि ने सीख लिया कि जीवन में खुशियाँ बाँटने से ही बढ़ती हैं। अब गोकुल के हर घर में रोशनी जगमगा रही है।