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गोकुल में आज जन्माष्टमी की सुबह है। भुवी बहुत उत्साहित है। चारों तरफ फूलों की खुशबू और ढोल की थाप सुनाई दे रही है। भुवी ने सोचा, आज का दिन कुछ खास होगा। क्या आज वह अपना रास्ता खोज पाएगा?
A personalized story for Bhuvi
Theme: janmashtami
A personalized janmashtami storybook featuring Bhuvi.
8 illustrated pages
गोकुल में आज जन्माष्टमी की सुबह है। भुवी बहुत उत्साहित है। चारों तरफ फूलों की खुशबू और ढोल की थाप सुनाई दे रही है। भुवी ने सोचा, आज का दिन कुछ खास होगा। क्या आज वह अपना रास्ता खोज पाएगा?
भुवी ने ऊपर देखा। दही की मटकी बहुत ऊँची लटकी थी। भुवी ने कहा, मुझे इसे तोड़ना है! भीम ने मुस्कुराते हुए कहा, तुम तो बहुत छोटे हो भुवी। क्या तुम सच में तैयार हो? भुवी ने अपना सिर हिलाया।
तभी मीरा वहाँ आई। उसने कहा, भुवी, हमें एक टीम बनानी होगी। भीम ने भुवी की तरफ देखा और कहा, तुम हल्के हो, शायद तुम सबसे ऊपर चढ़ सकते हो! भुवी का दिल तेजी से धड़कने लगा। उसने एक गहरी सांस ली।
ढोल बजने लगे। धक-धक, धक-धक! भुवी धीरे-धीरे ऊपर चढ़ने लगा। भीम ने उसे मजबूती से पकड़ा था। भुवी ने नीचे देखा और मुस्कुराया। उसने सोचा, बड़े होने का मतलब सिर्फ बड़ा होना नहीं, साथ चलना भी है।
अरे, भुवी का पैर फिसला! उसने घबराकर आँखें बंद कर लीं। भीम चिल्लाया, घबराओ मत भुवी! मीरा ने कहा, तुम कर सकते हो, बस अपने लक्ष्य पर ध्यान दो। भुवी ने अपनी घबराहट को एक तरफ रखा।
भुवी ने एक लंबी छलांग लगाई। उसने मटकी को छू लिया! सब लोग नीचे चिल्लाए, भुवी! भुवी! भुवी ने एक जोर की हंसी के साथ मटकी को धक्का दिया। यह उसका सबसे साहसी पल था।
छपाक! दही की बारिश होने लगी। भुवी और उसके दोस्त दही से भीग गए। सब लोग नाचने लगे और ढोल की आवाज तेज हो गई। भुवी को समझ आया कि टीम में हर किसी की अपनी जगह होती है।
रात हो गई थी। पूरा गोकुल दीयों की रोशनी से चमक रहा था। भुवी ने भीम और मीरा के साथ बैठकर सोचा, जीवन का सफर भी ऐसा ही है। अब भुवी को पता था कि उसे क्या करना है। सब बहुत खुश थे।