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आरव एक अनोखे जंगल में खड़ा था। वहाँ दो राजा आमने-सामने खड़े थे। वे दोनों बिल्कुल एक जैसे दिखते थे।
A personalized story for Aarav
Theme: ramayana
A personalized ramayana storybook featuring Aarav.
8 illustrated pages
आरव एक अनोखे जंगल में खड़ा था। वहाँ दो राजा आमने-सामने खड़े थे। वे दोनों बिल्कुल एक जैसे दिखते थे।
आरव सोच में पड़ गया कि कौन सुग्रीव है। दोनों राजाओं को पहचानना बहुत कठिन काम था। आरव की मदद करने के लिए गिलहरियाँ भी आईं।
आरव ने एक सुंदर विचार सोचा और मुस्कुराया। उसने पास के फूलों से एक माला बनाई। यह माला बहुत ही प्यारी लग रही थी।
राम पेड़ के पीछे से यह सब देख रहे थे। आरव ने अपनी माला को ध्यान से उठाया। वह अपनी चतुराई से समस्या सुलझाना चाहता था।
आरव धीरे-धीरे उन राजाओं के पास आगे बढ़ा। उसने सुग्रीव को पहचाना और उसके पास गया। आरव को अपनी बहादुरी पर गर्व महसूस हुआ।
आरव ने माला सुग्रीव के गले में डाल दी। अब कोई भी गलती नहीं कर सकता था। सुग्रीव बहुत खुश और हैरान थे।
लाल और पीले फूलों से बनी माला चमक रही थी। राम ने आरव की सराहना की और मुस्कुरा दिए। सबने आरव की बुद्धिमानी की खूब तारीफ की।
एक सरल विचार से बड़ी उलझन हल हो गई। वह माला अब सुग्रीव का ताज बन गई थी। आरव ने मुस्कुराकर सुग्रीव को देखा, और राम ने सिर हिलाकर उसकी तारीफ की।